मौड़ मंडी (हैप्पी जिंदल) 23 जनवरी - भगवान मनुष्य का रिश्ता जीवन साथी का होता है इस लिए भगवान मनुष्य के सबसे बड़े साथी हैं।ये शब्द परम् पूज्य महामंडलेश्वर स्वामी सुरेश्मुनी जी ने श्री गीता भवन मौड़ मंडी में प्रवचन के दौरान भगतों से कहे उन्होंने कहा के इश्वर तो हमारे सबसे बड़े मित्र हैं लेकिन मनुष्य ही इसे समज नही पाता। हम जिस संबंध में प्रभु को समजेंगे वे उसी में हमे मिल जायेंगे। चाहे व् माता का रिश्ता हो चाहे पिता का या मित्र का। लेकिन मनुष्य ही भगवन से संबंध बनाने में असफल रहता है क्यों के हमने कभी अपने आप को इश्वर के साथ जोड़ा ही नहीं है। हमे अपने आप को इश्वर के साथ जोड़ना चाहिए इसके लिए हमे मन लगा कर प्रभु का सिमरन करना चाहिए। और इसके लिए सबसे पहले अपना चरित्र स्वछ रखना चाहिए। स्वामी जी ने कहा के श्रीमदभागवत गीता में भगवान श्री कृष्ण ने यही कहा है के जो उन्हें सचे मन से जिस रिश्ते में देखता है वे उसी रूप में उसको मिलते हैं। अर्जुन की तरह मेरा और मेरे भगत का रिश्ता एक मित्र का होता है और मै हमेशा अपने भगतों के साथ रहता हूँ।गीता भवन के प्रधान श्री महंगा राम जी ने बताया के पूज्य महामंडलेश्वर स्वामी सुरेश्मुनी जी 28 जनवरी तक रोज शाम 4 से 5 बजे तक श्री गीता भवन में अपने प्रवचनों द्वारा भगतों को इश्वर रूपी रंग में रंगेंगे।

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